आप ही कुछ...…...
2122-1212-22/112
हम तुझे माहताब कह देते,
इन लबों को गुलाब कह देते//1
और कुछ तो कहाँ मुनासिब है,
बस तुझे लाजवाब कह देते//2
आपकी इन नशीली आंखों को,
एक जामे शराब कह देते//3
अपने दिल की न कह सके कुछ हम,
आप ही कुछ जनाब कह देते//4
सिर्फ़ इतनी थी आरज़ू तुमसे,
इश्क़ है बेहिसाब कह देते//5
उम्र भर के लिये इन आँखों में,
जो समाया , वो ख़्वाब कह देते//6
दो क़दम साथ चलके छोड़ दिया,
क्यों तुम्हें हम-रिक़ाब कह देते//7
तुमको पा लेते अब भी घर 'राजन',
ख़ुद को फिर बाज़याब कह देते//8
राजन तिवारी 'राजन'
इंदौर (म.प्र.)
7898897777